हर ट्रेन में होगा बायोटॉयलेट

नई दिल्ली। रेलवे ने अपनी पटरियों कोशौचमुक्तबनाने और सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाने का लक्ष्य 2021 से घटाकर 2019 पर लाने का फैसला किया है तथा तीन से पांच साल के भीतर जल पुनर्चक्रण की क्षमता 1.2 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 20 करोड़ लीटर करने का लक्ष्य तय किया है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल ने यहां विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि रेलवे 2019 तक अपने करीब 50-55 हजार कोचों को बायोटॉयलेट युक्त बना देगा जिनमें 1700-1800 कोचों में बायोटॉयलेट रेट्रोफिट किए जाएंगे। इस प्रकार से रेलवे अपने सभी ट्रैकों को शौचमुक्त बना देगी।

पहले सभी ट्रेनों में बायोटॉयलेट लगाने का लक्ष्य 2021 रखा गया था। रेलवे ने इस लक्ष्य को तीन साल पहले ही पूरा करने की योजना बनाई है और उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस समय तक 35 हजार कोचों में 1.40 लाख बायोटॉयलेट लगाए जा चुके हैं।

मित्तल ने कहा कि पर्यावरण रक्षा में जल संरक्षण का महत्व होता है। रेलवे ने 30 स्थानों पर जल पुनर्चक्रण संयंत्र लगाए हैं जिनकी कुल क्षमता 1.2 करोड़ लीटर की है। 32 अन्य जगहों पर भी ऐसे संयंत्र लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन से पांच साल में करीब 20 करोड़ लीटर जल के पुनर्चक्रण की क्षमता हो जाएगी। उन्होंने बताया कि करीब 1900 जगहों पर वर्षाजल संग्रहण प्रणाली लगाई जाएगी। (वार्ता)