No OBC in higher bureaucracy, only 10 % SC/ST हाईअर ब्यूरोक्रेसी में एससी-एसटी का प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से कम, ओबीसी का एक भी नहीं

में डीओपीटी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक हाईअर ब्यूरोक्रेसी में एससी-एसटी समुदाय का प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम था. वहीं ओबीसी जातियों का एक भी प्रतिनिधित्व नहीं था. सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रटरी, एडिशनल सेक्रेटरी और डिप्टी सेक्रेटरी के पदों पर कुल 431 अधिकारी काम कर रहे थे. इनमें एससी कैटेगरी से सिर्फ 28 अधिकारी थे, वहीं एसटी के सिर्फ 12. वहीं ओबीसी समुदाय से एक भी प्रतिनिधित्व नहीं था. डीओपीटी ने इस बारे में जानकारी दी थी कि हाईअर ब्यूरोक्रेसी में ओबीसी रिजर्वेशन की शुरुआत 1994 से हुई थी. 1994 के बाद आरक्षित सीटों से आए अधिकारियों ने इतनी वरिष्ठता हासिल नहीं की थी कि उन्हें एडिशनल सेक्रटरी, स्पेशल सेक्रेटरी या सेक्रेटरी के पदों पर नियुक्त किया जा सके.
अधिकारियों के चयन की जो प्रकिया अपनाई गई, उसने सामाजिक तौर पर पिछड़े वर्ग की नौकरशाही में भागीदारी को लेकर चिंताजनक हालात पैदा कर दिए हैं. ब्यूरोक्रेसी में पहले से ही अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्ग की भागीदारी कम है. वहीं डीओपीटी जिस प्रकिया से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर से ज्वाइंट सेक्रेटरी के लेवल पर अधिकारियों की भर्ती कर रही है, उसमें आरक्षण की व्यवस्था है ही नहीं.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस संबंध डाले गए एक आरटीआई के जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने कहा है कि एक पोस्ट के लिए रिजर्वेशन तय नहीं किया जा सकता है. इस स्कीम में भरा जाने वाला हर पोस्ट एक सिंगल पोस्ट है, इसलिए इस पर रिजर्वेशन लागू नहीं होता है. इनका सेलेक्शन अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के लिए हो रहा है. अगर सेलेक्शन एक ग्रुप मानकर किया जाए तो 9 पदों के लिए होने वाले सेलेक्शन में 2 ओबीसी और 1-1 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार शामिल किए जा सकते हैं.
कैसे होगा सलेक्शन?
डीओपीटी ने यूपीएससी को लिखे लेटर में कहा है कि नौकरशाही के इन पदों पर राज्य सरकार के अधिकारियों, पब्लिक सेक्टर, ऑटोनॉमस बॉडीज़ और यूनिवर्सिटीज़ के टैलेंटेड लोगों को डेप्यूटेशन बेसिस पर सेलेक्शन होगा. डेप्यूटेशन बेसिस पर अप्वाइंटमेंट में रिजर्वेशन देने का निर्देश नहीं है. इस बारे में यूपीएससी ने ज्यादा साफ तरीक से जवाब देते हुए कहा है कि डीओपीटी की आवश्यकता के मुताबिक ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदों पर कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर सेलेक्शन हो रहा है. डीओपीटी के निर्देश के मुताबिक रिक्रूमेंट प्रोसेस में रिजर्वेशन की जरूरत नहीं है.
एक तरफ अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ी जातियां अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुई हैं. आरक्षण ने इन जातियों को सशक्त किया है और देश निर्माण में इनकी भूमिका और भागीदारी बढ़ी है. लेकिन सत्ता के केंद्र के इर्द-गिर्द और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले हाईअर ब्यूरोक्रेसी में उनकी भागीदारी हमेशा से कम रही है. 2018 में एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक 81 सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में सिर्फ 2 एससी और 3 एसटी समुदाय से थे. ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में एससी-एसटी समुदाय की भागीदारी 9 परसेंट थी. वहीं ओबीसी की भागीदारी और भी कम रही. सेक्रेटरी और एडिशनल सेक्रेटरी लेवल का एक भी अधिकारी ओबीसी का नहीं था. ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल पर 13 ओबीसी अधिकारी थे. हाईअर ब्यूरोक्रेसी में इनकी भागीदारी सिर्फ 3 फीसदी थी.
एससी-एसटी की भागीदारी न के बराबर
2017 में 85 सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में से सिर्फ 2 एससी-एसटी समुदाय से थे. डायरेक्टर और उसके ऊपर के कुल 747 पदों में से सिर्फ 60 अधिकारी (8 परसेंट) एससी-एसटी समुदाय से थे. सेक्रेटरी लेवल के 85 अधिकारियों में सिर्फ 2 अधिकारी एससी-एसटी से थे. इनका प्रतिनिधित्व सिर्फ 2.35 फीसदी था. एडिशनल सेक्रेटरी के कुल 70 अधिकारियों में एससी के 4 और एसटी के 2 अधिकारी थे. 293 ज्वाइंट सेक्रेटरी में 21 एससी से और सिर्फ 7 एसटी से थे. डायरेक्टर लेवल के 299 अधिकारियों में एससी के 33 और एसटी से 13 अधिकारी थे.
दिसंबर 2015 में पीआईबी ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में काम कर रहे सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रेटरी और डिप्टी सेक्रेटरी की कास्ट वाइज़ जानकारी दी. 2015 में एससी और एसटी समुदाय से सेक्रेटरी लेवल के सिर्फ 3-3 अधिकारी थे. जबकी ओबीसी जातियों में एक भी सेक्रेटरी लेवल का अधिकारी नहीं था. ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के कुल 278 अधिकारियों में एससी समुदाय के 24, एसटी के 10 और ओबीसी के 10 अधिकारी थे. वहीं डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के कुल 45 अधिकारियों में एससी के 4, एसटी के 3 और ओबीसी के 10 अधिकारी थे.