16 साल बाद साबित हुआ ‘मैं जिंदा हूं’: नाना पाटेकर के रसोइये संतोष की अजब गज़ब दास्तान

सरकारी दस्तावेज में मृत संतोष मूरत सिंह (मैं जिंदा हूं) की हक की लड़ाई बुधवार को मुकाम तक पहुंची। 16 साल से खुद को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के रसोइये संतोष को जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर जमीन पर कब्जा दिलाया। इतना ही नहीं, उसका नाम भी सरकारी दस्तावेज में दर्ज कराया गया। डीएम ने दोबारा अवैध कब्जा करने वालों पर भूमाफिया की धाराओं में कठोर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। इस पूरी कार्रवाई से संतोष को जमीन के साथ ही जिंदगी भी मिली।
राइफल क्लब में जनसुनवाई के दौरान चौबेपुर के छितौनी निवासी संतोष मूरत सिंह उर्फ मैं जिंदा हूं ने कुछ लोगों पर सरकारी दस्तावेज से उसका नाम हटवाकर अवैध कब्जा करने की शिकायत की। डीएम ने उसके कागजात की जांच के बाद नगर मजिस्ट्रेट, एडीएम सदर, कानूनगो को लेकर मौके पर पहुंचे और उसकी जमीन की नापी कराई। प्रशासन ने सरकारी दस्तावेज में उनका नाम दर्ज कर घर, खेत सहित अन्य में उनके हिस्से की जमीन पर कब्जा दिलाया। यहां बता दें कि कई एकड़ जमीन के मालिक संतोष वर्ष 2000 में फिल्म आंच की शूटिंग के लिए आए अभिनेता नाना पाटेकर के संपर्क में आए और उनके साथ मुंबई चले गए। नाना पाटेकर के घर रसोइए का काम करने के दौरान मुंबई में ही वर्ष 2003 में दलित युवती से शादी कर ली।
इस शादी को लेकर पट्टीदारों ने उनका विरोध किया और बाद में उनके मुंबई वापस होने पर ट्रेन विस्फोट में उनकी मौत की अफवाह फैलाकर जमीन अपने नाम करवा दी। तेरहवीं की सूचना पर गांव पहुंचे संतोष को जमीन से बेदखल कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने गले में मैं जिंदा हूं की तख्ती टांग ली और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध शुरू किया।
वाराणसी के जिला मुख्यालय से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक प्रदर्शन किया और तिहाड़ जेल भी रहे। हर अधिकारी के सामने गुहार लगाई, मगर 16 साल तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि खतौनी के हिसाब से संतोष मूरत का जमीन पर 16वां हिस्सा था। मगर, सरकारी दस्तावेजों को नजरअंदाज कर उस जमीन को चार बार बेचा गया है। डर के चलते वह गांव नहीं आता था। जांच में उसका मालिकाना हक पाया गया है और उसे कब्जा दिलाया गया है। कब्जा करने वालों पर भूमाफिया की कार्रवाई होगी।