क्रिकेट में करियर बनवाने के नाम पर गोरखधंधा, क्राइम ब्रांच के रडार पर कई नेता

क्रिकेट, जिसके हर चौके-छक्के पर करोड़ों रुपये इधर-उधर हो जाते हैं, उसमें करियर बनाने के लिए मैदान में पसीना बहाना तो समझ आता है, लेकिन विभिन्न राज्यों के क्रिकेट बोर्ड में शामिल नेताओं ने इसे धंधा बना दिया है। अंडर-19 और अंडर-23 की टीम में खिलाने के लिए युवाओं से मोटी रकम वसूली जाती है। यह खेल कई प्रदेशों के क्रिकेट बोर्ड में चल रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इन बोर्डों में बतौर पदाधिकारी शामिल होते हैं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के पास ऐसे कई नेताओं का नाम है, जिन्होंने क्रिकेट में करियर बनाने के नाम पर कथित तौर से अच्छी-खासी धनराशि ली है। इनमें सत्ताधारी पार्टी के नेता भी बताए जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच ने इन नेताओं पर हाथ डालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मांगी है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे कई नेताओं की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
क्राइम ब्रांच ने हाल ही में दिल्ली से क्रिकेट के दो कोच गिरफ्तार किए थे। इनसे पूछताछ में पता चला कि दिल्ली-एनसीआर के बीस से ज्यादा युवाओं को क्रिकेट खिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये वसूल चुके हैं। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा उन नेताओं तक पहुंचाया जाता था, जो प्रदेशों की क्रिकेट एसोसिएशन में पदाधिकारी हैं।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा…
करीब एक साल से यह गोरखधंधा चल रहा था। यह मामला जब बीसीसीआई के संज्ञान में आया तब जाकर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बीसीसीआई की शिकायत पर ही यह मामला दर्ज किया था। केस की जांच कर रहे अफसरों का कहना है, आरोपियों ने ऐसे कई नेताओं का नाम बताया है, जो इस धंधे से जुड़े हुए हैं।
पुलिस टीम अब ऐसे नेताओं के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है ताकि उनकी गिरफ्तारी में कोई कानूनी अड़चन पैदा न हो। जैसे ही क्राइम ब्रांच को ऊपर से हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही आरोपियों के यहां दबिश दे दी जाएगी। फिलहाल मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड के क्रिकेट बोर्ड को लेकर क्राइम ब्रांच जांच कर रही है।
इस तरह चल रहा था गोरखधंधा …
आरोपियों से की गई पूछताछ में सामने आया है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर पूर्वी राज्यों के क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को मंजूरी दी थी। वहां पर क्रिकेट खेलने वालों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में इन प्रदेशों के बोर्ड दूसरे राज्यों से क्रिकेट खिलाड़ियों को अपने यहां मौका देते हैं। इसके बदले में उनसे बड़ी धनराशि वसूल की जाती है। क्रिकेट बोर्ड में बैठे पदाधिकारियों ने कुछ एजेंट रखे हुए थे। ये एजेंट विभिन्न राज्यों में चल रही क्रिकेट अकादमी में जाकर नए खिलाड़ियों से मिलते हैं और उन्हें करियर बनाने का झांसा देते हैं। युवा खिलाड़ियों को अपनी बात का विश्वास दिलाने के लिए उन्हें बोर्डों में बतौर पदाधिकारी नियुक्त नेताओं से मिलवाया जाता था।
क्रिकेटर को होता है यह फायदा …
किसी राज्य की ओर से अंडर-19 और अंडर-23 के मैच खेलने पर खिलाड़ी को एक सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसमें लिखा होता है कि उसने कब, कौन सी सीरिज में और किस राज्य की ओर से भाग लिया है। भविष्य में जब वह कहीं पर खेलने जाता है तो इस सर्टिफिकेट का बेहतर करियर के लिए इस्तेमाल करता है। इससे यह साबित होता है कि वह खिलाड़ी वास्तव में राज्य स्तर पर खेला है। साथ ही किसी क्रिकेट क्लब या स्कूल क्लब में नौकरी के लिए आवेदन करते समय इस तरह के सर्टिफिकेट उनकी दावेदारी को मजबूती प्रदान करते हैं।