इस्लामिक सहयोग संगठन ने भारत से जम्मू-कश्मीर से कर्फ्यू हटाकर हालात सामान्य करने की अपील की

नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। जम्मू कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान को इस्लामिक सहयोग संगठन का साथ मिला है। इसी की वजह से इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भारत से घाटी में बीते 13 दिनों से जारी कर्फ्यू को तुरंत हटाकर वहां के हालात को सामान्य करने की अपील की है। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक वीडियो संदेश में ओआईसी के इस फैसले के बारे में जानकारी भी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह एक और कूटनीतिक उपलब्धि है कि ओआईसी ने मांग की है कि भारत अधिकृत कश्मीर से तुरंत कर्फ्यू हटा ले।
उन्होंने कहा कि हाल ही में ओआईसी सदस्यों की मीटिग हुई थी और जेद्दा में संगठन की बैठक में भाग लिया था, उसी बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि उस मीटिंग के बाद ही ओआईसी ने एक बयान जारी कर इसके बारे में बताया था। दरअसल कश्मीर में जारी पाबंदियों की वजह से वहां का जनजीवन प्रभावित है, स्कूल कालेज, बाजार सब बंद है। ईद के दौरान कुछ समय के लिए पाबंदी में छूट दी गई थी उसके बाद फिर से वहां पर पाबंदी सख्त कर दी गई।
खाने और दवाओं की कमी का सामना कर रहा इलाका
उन्होंने कहा कि कब्जे वाले कश्मीर में सख्ती की वजह से वहां के लोग भोजन और दवाओं की कमी का सामना कर रहे थे। यहां कर्फ्यू के कारण बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचने में समस्या हो रही थी। वो अपने को असमर्थ पा रहे थे। उन्होंने कहा कि कर्फ्यू हटाने की मांग पाकिस्तान से नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम जगत से हो रही है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी ओआईसी द्वारा उठाई गई आवाज पर ध्यान देगी। उधर प्रधानमंत्री इमरान खान विश्व भर के देशों से कश्मीर मुद्दे पर एकजुट होकर अनुच्छेद 370 की स्थिति को फिर से वैसे ही किए जाने की मांग कर रहे हैं मगर उनको कामयाबी नहीं मिल रही है।
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)ने जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों की धार्मिक आजादी पर अंकुश लगाए जाने पर भी ध्यान दिया है, जिसमें ईद के अवसर पर रोक लगाया जाना भी शामिल रहा है। वैसे पाकिस्तान की ओर से ये कहा जा रहा है कि भारत ने ईद के मौके पर भी रोक लगा रखी थी मगर यहां प्रशासन की ओर से ईद को बेहतर तरीके से मनाने के लिए यहां तमाम चीजों पर राहत दी गई थी। उसके बाद लोग घरों से निकले और खरीदारी की थी। ओआईसी का कहना है कि कश्मीर में कर्फ्यू लगाकर मुसलमानों को उनके धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करने से भी रोकने की कोशिश की गई।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का भी उल्लंघन
ओआईसी की बैठक में ये भी कहा गया कि धार्मिक अधिकारों से वंचित करना अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का भी उल्लंघन है और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह एक अपमान भी है। इसलिए, ओआईसी ने भारतीय अधिकारियों से कश्मीरी मुसलमानों के अधिकारों की सुरक्षा और बिना किसी बाधा के उनके धार्मिक कार्यक्रमों को उसी हिसाब से सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। ओआईसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के आधार पर जम्मू- कश्मीर विवाद के समझौता वार्ता के लिए प्रयासों को तेज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और इससे संबंधित अन्य अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी बुलाया है। जिससे इसका निपटारा हो सके।
प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन किया और बाद में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और भारत के बीच चल रहे तनाव पर चर्चा की। पाकिस्तान ने भारत की ओर से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के विरोध में 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस पर एक काला दिन मनाया था और देश भर में जम्मू और कश्मीर में विरोध प्रदर्शन रैलियां की गईं। विरोध दर्ज कराने के लिए घाटी में भारत की ओर से कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंध और अन्य चीजों की निंदा की गई।
विश्व भर के देशों से किया संपर्क, नहीं मिला सहयोग
इमरान ने कश्मीर के मुद्दे को लेकर विभिन्न विश्व नेताओं से भी संपर्क किया और उन्हें भारत के हाल के कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने भारत की ओर से जम्मू कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई, इससे पहले उन्होंने अपने ट्वीट में विश्व के अन्य देशों से कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट रहने का आग्रह किया।
इमरान खान पहले से ही कह रहे है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासन कब्जे वाली घाटी में अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने में विफल रहेगा। उनका कहना है कि फांसीवादी, हिंदू वर्चस्ववादी मोदी सरकार को पता होना चाहिए कि आतंकवादियों और सेना को बेहतर तरीके और ताकतों द्वारा हराया जा सकता है। इतिहास देखें तो ये पता चलता है कि जब कोई राष्ट्र स्वतंत्रता संग्राम में एकजुट होता है और उसे मृत्यु का भय नहीं होता है तो कोई भी ताकत उसे अपना लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक सकती है।