मंदी ने रोक दीं लाखों भर्तियां, ऑटोमोबाइल समेत इन सेक्टर्स में नहीं मिल रहीं नई नौकरियां: स्टडी

नई दिल्ली : भारत में बेरोजगारी की दर 45 सालों के सबसे खराब दौर में है। इस दौरान लगभग हर सेक्टर में हायरिंग काफी कम है और स्लोडाउन की स्थिति दिख रही है। केयर रेटिंग्स लिमिटेड की एक स्टडी के मुताबिक बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों, ऑटो मेकर्स, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में हायरिंग सबसे कम है। इस साल मार्च में खत्म हुए फाइनैंशल इयर की 1,000 कंपनियों की रिपोर्ट के आकलन के बाद यह बात कही गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच सर्विस सेक्टर एक ऐसा स्थान है, जहां सबसे ज्यादा उम्मीदें दिखती हैं। जॉब ग्रोथ की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा अवसर देखने को मिले हैं। मार्च तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 5 साल के सबसे निचले स्तर पर रही है और अब हायरिंग में कमी से साफ है कि देश आर्थिक संकट के दौर में है।
चीजें नहीं बदलीं तो जाएंगे और जॉब्स: गोयनका
भारत को आकर्षक निवेश डेस्टिनेशन के तौर पर पेश करने के पीएम नरेंद्र मोदी के प्लान को भी इससे झटका लग सकता है। इसके अलावा जॉब का संकट गहराने से सामाजिक तनाव में भी इजाफा हो सकता है। केयर रेटिंग्स के मुताबिक मार्च 2017 में रोजगार में वृद्धि 54 लाख की थी, जो मार्च 2018 में 57 लाख के करीब पहुंच गई, यह 6.2 पर्सेंट का इजाफा था।
नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अर्थव्यवस्था को लेकर बताया रोडमैप
इस साल मार्च में यह आंकड़ा 60 लाख का ही रहा और जॉब ग्रोथ महज 4.3 पर्सेंट ही रही। केयर रेटिंग्स की मानें तो हॉस्पिटैलिटी यानी सर्विस सेक्टर में हायरिंग और आउटसोर्सिंग में इजाफा हुआ है। लेकिन, माइनिंग, स्टील और आयरन जैसी दिग्गज कंपनियों में एंप्लॉयीज की संख्या में कमी आई है। इसकी वजह उत्पादन में कमी और कंपनियों के बैंकरप्ट होने जैसे मामले हैं।