भोपाल में कलियासोत डैम के पास बाघ 123 का मूवमेंट…बढ़ाई पेट्रोलिंग

भोपाल . लंबे समय तक मिंडोरा तक सीमित रहने वाला बाघ 123-1 अपनी क्षेत्र की सीमा बढ़ा रहा है। इसने अपनी सीमा कलियासोत डैम तक बढ़ा ली है। यदि वन विभाग ने जल्दी ही कोई कदम नहीं उठाए, तो यह जागरण लेक सिटी के पास से निकली 80 फीट रोड पकड़कर कोलार रोड तक पहुंच सकता है। दरअसल, बाघ 123-1 का एक फाेटाे वायरल हाे रहा है जिसमें वह अपनी टेरेटरी बढ़ा रहा है। यह बाघ 123-1 का पहला फाेटाे है, जाे सार्वजनिक हुअा है।
अभी तक बाघ टी 123-1 कैमरा ट्रैप में ही कैप्चर हाेता रहा है । वन विभाग ने भी माना कि बाघिन 123 का वयस्क हो चुका बाघ टी 123-1 है। इसका मूवमेंट इन दिनों से कलियासोत तक बना हुआ है। अधिकारियाें का कहना है कि यह फाेटाे अभी का नहीं है, जून के अासपास का है।
समरधा रेंज के रेंजर एके झंवर का कहना है कि फाेटाे ताे बाघ 123-1 का ही है लेकिन ये अभी का नहीं है। तकरीबन डेढ़ दो माह से ज्यादा पुराना है। उनका मानना है कि बाघ का मूवमेंट कलियासाेत डैम की अाेर ही है इसलिए दिन रात पेट्राेलिंग की जा रही है अाैर लाेगाें काे इलाके में न जाने की समझाइश दी जा रही है।
कौन है यह बाघ : बाघिन 123 ने वर्ष 2016 में मिंडोरा में दो शावकों को जन्म दिया था। वन विभाग ने शावकों की पहचान के लिए नर बाघ का नाम टी-123-1 और मादा शावक को 123- 2 नाम दिया है। तीन वर्षीय बाघ ने मां का साथ छोड़कर अपनी टेरेटरी बनाना शुरू कर दी है।
इंसानों के करीब जाता था बाघ टी 121 : बाघिन टी- 21 द्वारा जन्मा नर बाघ 121 कलियासोत डैम का रेसीडेंट बाघ था। इसके इंसानों से डर नहीं लगता था। यह अक्सर शाम के वक्त भीड़ देखकर कलियासोत डैम में उतर जाता था। लोग इसके फोटो क्लिक करते रहते थे। बाद में पिता से टेरीटोरियल फाइट में हारने के बाद यह इच्छावर की ओर मूव कर गया था। जहां से इसे रेस्क्यू कर सतपुड़ा नेशनल पार्क छोड़ा गया।
इंसानाें से दूर रहे बाघ, इसलिए की जा रही फैंसिंग : भोपाल वन मंडल के डीएफओ एचएस मिश्रा का कहना है कि हर नर बाघ अपनी टेरेटरी मार्क करता है। ये भटकते हुए रहवासी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि बाघ जंगल से बाहर न निकले, इसके लिए फैंसिंग की जा रही है। कुल 11 किमी की फैंसिंग होना है। तीन किमी तक फैसिंग हो गई है। 8 किमी तक ओर होना है जिसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरदार खाेह की अाेर वाली फैंसिंग हाेने के बाद बाघ का मूवमेंट रहवासी इलाके में नहीं हाेगा।