Industrial township and new international airport to be built in 20 thousand acres near Dewas

Bhopal, August 28, 2019 (Muslim Saleem): Indore-Bhopal Six Lane Access Control Green Field Express-Way. The bigger the name, the bigger the project. Its blueprint is ready. In this, there is a proposal to create an industrial township in the total of 20 thousand acres on the other side of Sonkutch and Expressway between the existing Bhopal-Indore highway and expressway. A new international airport will also be built here. Its blueprint is ready.
Meanwhile, SR Mohanty has discussed with officials on the expressway on Tuesday. The Chief Minister will review it on Wednesday. The state government will acquire the land for the township along the expressway. While NHAI will build the expressway. It is being told that there is also a preparation to declare this expressway as a national highway. The Regional Officer of NHAI has written to the headquarters in this regard. This issue is currently pending under the Union Ministry of Road Transport and Highways for administrative approval.
Keeping in view the duration of the project, a co-ordination committee is also proposed, including ACS One, ACS Finance, ACS Scheme, PS Udyog, PS PWD, PS Urban Development, Commissioner Bhopal and Ujjain, Collector Bhopal, Raisen, Sehore and Dewas Will stay
 The project will have three phases: The first phase will be completed in three years, in which an area of ​​2000 hectares will be developed under the EPC mode (Engineering, Precision and Construction). After this, 2000-2000 hectare will be developed for the next 10 years in the remaining three phases under PPP or EPC mode. In this township, CC Road, Smart Parking, Traffic Monitoring and Control, Warehouse, Weigh Outposts, Truck Terminal, Integrated Control and Command Center, Administrative Building, SCADA, CCTV Surveillance, 24 Hour Security, Commercial Center, Educational Institute and Hospital and Infrastructure Other things will be included.
Three corridors will be connected with expressway ….: Three corridors will be connected to Bhopal-Indore expressway. Among these, Jabalpur-Bhopal Fourlane (327 km) will be the first, Kandla-Dhrangadhara-Ahmedabad-Godhra-Dahod-Indore-Deva-Bhopal (1038 km) and the third will be Betul-Bhopal (166 km). Betul and Jabalpur corridors will meet near Bhopal. Kandla Wala will meet Dewas and Sagar Wala in Bhopal.
Why the land near Dewas? : The department claims that there is no forest land here. Most of the land is without agriculture. Apart from this, 2000 hectares of land is together.
 There will be talk on options for development model: The model of development is mentioned in the proposed roadmap. In this, the state government should construct itself. Go to a joint venture with someone or a private public partnership. It can go to area shares, revenue shares or other options. The Chief Minister will take a decision on this.
Three points… The state government will spend Rs 530 crore on land acquisition.

  1. The expressway will have 158.25 acres of forest, 35.16 in government and 857 hectares in private sector. 530 crores on acquisition. The state government will spend.
  2. Expressway will be part of the proposed economic corridor from Sagar to Kandla under the Bharat-Mala project, DPR will create Feedback Infra Private Limited.
  3. A 119.9 km six-lane access controlled expressway between Barjhiri to Karanavad in Bhopal. 26.9 km West Southern Fourlane Bypass from Mandideep to Barjhiri.
    Unique design: If traffic increases later on the expressway, it can be converted into eight lanes without tampering with the two-lane service road. The state government is considering making it on hybrid annuity mode, in which the government provides 40% of the amount. The remaining amount would have to be invested by the Producing Agency. The state government provides 60% of this amount in three installments in the coming 15 years.
    Claim: 7.6 lakh people will get employment – The format has claimed that the township will help the country’s GDP by Rs 1.20 lakh crore. Three lakh people will get direct and 4.6 lakh people will get indirect employment. 60 thousand crore rupees will be invested in the next 10 years.
    First Phase: In three years, half the cost of the government – the first phase of the project will be completed in three years. One thousand crore rupees for this Government can take loan of Rs. 10% of the cost of this phase will be given by the Department of Industries and 40% of the budget by the State Government. The government will have to give 400 crore rupees every year by 2023.
    Project timeline how long
    Land acquisition, forest diversion and environment clearance by December 2019
    Tender process by March 2020
    Producer agency set for June 2020
    The project will be completed by June 2023, with a total cost of Rs 5435 crore.
    देवास के पास 20 हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप व नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा
    भोपाल । इंदौर-भोपाल सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे। जितना बड़ा नाम, उतना ही बड़ा प्रोजेक्ट। इसका खाका तैयार हो गया है। इसमें मौजूदा भोपाल-इंदौर हाईवे और एक्सप्रेस-वे के बीच में सोनकच्छ और एक्सप्रेस-वे के दूसरी तरफ कुल 20 हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव है। यहीं नया इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बनेगा। इसका खाका तैयार हो गया है।
    इस बीच मंगलवार को एक्सप्रेस-वे को लेकर मुख्य सचिव ने एसआर मोहंती ने अधिकारियों के साथ चर्चा की है। बुधवार को मुख्यमंत्री इसका रिव्यू करेंगे। एक्सप्रेस-वे के साथ टाउनशिप के लिए जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार करेगी। जबकि एक्सप्रेस-वे का निर्माण एनएचएआई करेगी। बताया जा रहा है कि इस एक्सप्रेस-वे को नेशनल हाईवे घोषित करने की भी तैयारी है। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी ने मुख्यालय को इस संबंध में लिख दिया है। यह मसला अभी प्रशासकीय स्वीकृति के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं हाईवे मंत्रालय के अधीन लंबित है।
    प्रोजेक्ट की अवधि को ध्यान में रखकर एक को-आर्डिनेशन कमेटी का भी प्रस्ताव है, जिसमें एसीएस वन, एसीएस वित्त, एसीएस योजना, पीएस उद्योग, पीएस पीडब्ल्यूडी, पीएस नगरीय विकास, कमिश्नर भोपाल व उज्जैन, कलेक्टर भोपाल, रायसेन, सीहोर व देवास रहेंगे।
    इस प्रोजेक्ट के तीन चरण होंगे : पहला चरण तीन साल में पूरा होगा, जिसमें ईपीसी मोड (इंजीनियरिंग, प्रिक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) के तहत 2000 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास होगा। इसके बाद पीपीपी अथवा ईपीसी मोड के तहत बाकी के तीन चरणों में आगामी 10 वर्ष तक 2000-2000 हैक्टेयर का विकास होगा। इस टाउनशिप में सीसी रोड, स्मार्ट पार्किंग, ट्रेफिक मानिटरिंग एंड कंट्रोल, वेयरहाउस, तौल चौकियां, ट्रक टर्मिनल, इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर, एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग, स्काडा, सीसीटीवी सर्विलांस, चौबीस घंटे सिक्यूरिटी, कमर्शियल सेंटर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट व हॉस्पिटल व इंफ्रास्ट्रक्चर की अन्य चीजें शामिल होंगी।
    एक्सप्रेस-वे से जुड़ेंगे तीन काॅरिडोर…. : भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस-वे से तीन कॉरिडोर और जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर-भोपाल फोरलेन (327 किमी) पहला, कांडला-ध्रंगाधरा-अहमदाबाद-गोधरा-दाहोद-इंदौर-देवा-भोपाल (1038 किमी) दूसरा और तीसरा बैतूल-भोपाल (166 किमी) होगा। बैतूल और जबलपुर कॉरिडोर भोपाल के पास मिलेंगे। कांडला वाला देवास और सागर वाला भोपाल में मिलेगा।
    देवास के पास की जमीन ही क्यों ? : विभाग का दावा है कि यहां फॉरेस्ट की जमीन नहीं है। ज्यादातर जमीन बिना कृषि की और पड़त है। इसके अलावा 2000 हैक्टेयर जमीन एक साथ है।
    विकास के माॅडल के विकल्पों पर होगी बात : प्रस्तावित खाके में विकास के माॅडल बताए गए हैं। इसमें राज्य सरकार खुद निर्माण करे। किसी के साथ ज्वाइंट वेंचर में जाए या फिर प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप करे। इसमें एरिया शेयर, रेवेन्यू शेयर या अन्य विकल्प पर जा सकते हैं। इस पर मुख्यमंत्री निर्णय लेंगे।
    तीन पॉइंट्स… जमीन अधिग्रहण पर राज्य सरकार खर्च करेगी 530 करोड़ रु.
  4. एक्सप्रेस-वे में फारेस्ट की 158.25, सरकार की 35.16 और निजी क्षेत्र की 857 हेक्टेयर जमीन होगी। अधिग्रहण पर 530 करोड़ रु. राज्य सरकार खर्च करेगी।
  5. भारत-माला प्रोजेक्ट के तहत सागर से कांडला तक प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा होगा एक्सप्रेस-वे, डीपीआर बनाएगी फीडबैक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड।
  6. भोपाल के बड़झिरी से करणावद के बीच 119.9 किमी का छह-लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे। मंडीदीप से बड़झिरी तक 26.9 किमी का वेस्ट सर्दर्न फोरलेन बायपास।
    अनूठी डिजाइन : एक्सप्रेस-वे पर यदि बाद में ट्रैफिक बढ़ता है तो दो-लेन के सर्विस रोड में छेड़छाड़ किए बिना इसे आठ लेन में बदला जा सकेगा। राज्य सरकार इसे हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर बनाने का विचार कर रही है, जिसमें 40% राशि सरकार देती है। शेष राशि का निवेश निर्माता एजेंसी को करना होता। यह 60% राशि आने वाले 15 साल में तीन किस्तों में राज्य सरकार देती है।
    दावा : 7.6 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा – प्रारूप में दावा किया गया है कि टाउनशिप से देश की जीडीपी में 1.20 लाख करोड़ रुपए की मदद होगी। तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 4.6 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। 60 हजार करोड़ रुपए का निवेश अगले 10 वर्षों में होगा।
    पहला चरण : तीन साल में, आधा खर्च सरकार का – प्रोजेक्ट का पहला चरण तीन साल में पूरा होगा। इसके लिए एक हजार करोड़ रु. का कर्ज सरकार ले सकती है। इस फेज की लागत का 10% उद्योग विभाग और 40% बजट राज्य सरकार देगी। सरकार को 2023 तक हर साल 400 करोड़ रुपए देने होंगे।
    प्रोजेक्ट टाइम लाइन कब से कब तक
    दिसंबर 2019 तक भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट डायवर्सन और पर्यावरण की मंजूरी
    मार्च 2020 तक निविदा की प्रक्रिया
    जून 2020 तक निर्माणकर्ता एजेंसी तय
    जून 2023 तक प्रोजेक्ट पूरा होगा, कुल लागत 5435 करोड़ रु.