FIR lodged against director and superintendent of Indore Eye Hospital

Indore/Bhopal, August 30, 2019 (Ataullah Faizan):. After the cataract surgery at Indore Eye Hospital, the Chhatripura police finally registered an FIR against the hospital’s medical director Dr. Sudhir Mahabardhe and the medical superintendent Dr. Suhas Bande. Sections 336, 337 and 338 along with 34 have been imposed against both.
For this, the administration and CMHO Dr. Praveen Jadia had to make a lot of effort. The police was not registering a case citing lack of documents. The CMHO spent about seven hours at the police station on Wednesday and Thursday. After this, Additional Collector Kailash Wankhede made a call to the police officers, then the FIR could be registered at four o’clock on Thursday evening.
The clauses imposed on both doctors, it seems, when someone does his work in such a way that it puts a threat on one’s life. Section 336 carries a maximum penalty of three months and a fine of two and a half rupees, a penalty of a maximum of six months and a fine of 500 rupees in section 337 and a maximum penalty of two years and a fine of one thousand rupees in 338. Section 34 is charged with having more than one person in a crime. All these clauses are bailable, that is, the police will get bail only and the arrest will not come and the case will go to court. Significantly, 15 patients had infections during the cataract operation, out of which 5 had lost their eyesight.
इंदौर आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर और सुप्रिंटेंडेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज
इंदौर. इंदौर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद मरीजों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में आखिरकार छत्रीपुरा पुलिस ने हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुधीर महाशब्दे और मेडिकल सुप्रिंटेंडेंट डॉ. सुहास बांडे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। दोनों के खिलाफ धारा 336, 337 और 338 के साथ 34 लगाई गई है।
इसके लिए प्रशासन और सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया को काफी मशक्कत करना पड़ी। पुलिस दस्तावेजों में कमी बताकर केस दर्ज नहीं कर रही थी। सीएमएचओ ने बुधवार और गुरुवार को थाने में करीब सात घंटे बिताए। इसके बाद अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े ने पुलिस अफसरों को फोन किए, तब गुरुवार शाम चार बजे एफआईआर दर्ज हो सकी।
दोनों डॉक्टरों पर जो धाराएं लगाई गई हैं, वह तब लगती हैं, जब कोई अपना काम इस तरह उपेक्षापूर्वक करे कि इससे किसी के जीवन पर खतरा आ जाए। धारा 336 में अधिकतम तीन माह की सजा व ढाई सौ रुपए अर्थदंड, धारा 337 में अधिकतम छह माह की सजा व 500 रुपए अर्थदंड और 338 में अधिकतम दो साल की सजा व एक हजार रुपए का अर्थदंड लगता है। धारा 34 अपराध में एक से अधिक लोगों के होने पर लगती है। यह सभी धाराएं जमानती हंै, यानी थाने से ही जमानत मिल जाएगी और गिरफ्तारी की नौबत नहीं आएगी व कोर्ट में केस चलेगा। गौरतलब है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान 15 मरीजों को संक्रमण हुआ था जिनमें से 5 की आंखों की रोशनी चली गई थी।