मंदी की मार : सूरत में 5 लाख से अधिक हीरा कर्मचारी इस साल दिवाली पर बोनस से महरूम रहेंगे

सूरत: ‘हीरों के शहर’ गुजरात के सूरत में 5 लाख से अधिक कर्मचारी इस साल दिवाली पर बोनस से महरूम रहेंगे। हर साल अपने कर्मचारियों को बोनस के तौर पर कार, जूलरी और फ्लैट देने वाले मशहूर हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया ने भी इस साल हीरा उद्योग में मंदी को देखते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ढोलकिया ने कहा कि हीरा उद्योग वर्ष 2008 की मंदी से भी ज्‍यादा भीषण मंदी से गुजर रहा है।
ढोलकिया ने कहा, ‘इस साल मंदी वर्ष 2008 में आई मंदी से भी ज्‍यादा भीषण है। जब पूरा उद्योग मंदी का शिकार है तो हम कैसे गिफ्ट का खर्च उठा दे सकते हैं? हम हीरा कर्मचारियों की आजीविका को लेकर ज्‍यादा चिंतित हैं। पिछले सात महीने में हीरा उद्योग से 40 हजार लोगों की नौकरियां गई हैं। यही नहीं जो कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनकी सैलरी 40 फीसदी तक घटा दी गई है।
मंदी की हालत यह है कि जो कंपनियां काम कर रही हैं, उन्‍हें अपना काम कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस साल ऐसा पहली बार हुआ है कि हीरे की दिग्‍गज कंपनी डी बीयर्स को को अपना उत्‍पादन घटाना पड़ा है। बता दें कि सावजी ढोलकिया अपने कर्मचारियों को हर साल बोनस के तौर पर कार और फ्लैट देने वाले हीरा कारोबारी हैं। ढोलकिया 2011 से हर साल कर्मचारियों को इसी तरह के दिवाली बोनस देते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से दिवाली के मौके पर अपने कर्मचारियों को खास तोहफा देकर सुर्खियां बटोरने वाले हीरा कारोबारी और हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन सावजी ढोलकिया इस बार फिर चर्चा में हैं। इस दिवाली पर भी बोनस के तौर पर 600 कर्मचारियों को कार और 900 कर्मचारियों को एफडी दी जाएगी। इस बार खास बात यह है कि पहली बार चार कर्मचारियों को यह तोहफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से मिल रहा है। आइए जानते हैं, कौन हैं सावजी ढोलकिया…
13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा
सावजी ढोलकिया अमरेली जिले के दुधाला गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में स्कूली शिक्षा छोड़ दी और सूरत में अपने चाचा के डायमंड बिजनस में हाथ बंटाने लगे।
कर्ज लेकर शुरू किया था हीरा कारोबार
अपने चाचा से कर्ज लेकर उन्होंने हीरा कारोबार शुरू किया और अपनी मेहनत से उसे इस मुकाम तक पहुंचाया।
हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स की स्थापना
डायमंड पॉलिशिंग में 10 साल की कठोर मेहनत के बाद ढोलकिया ने वर्ष 1991 में हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स की स्थापना की। उस वक्त कंपनी की सेल नाम मात्र की थी।
2014 में बंपर बढ़त
मार्च 2014 तक आते-आते कंपनी का टर्नओवर 4 अरब रुपये तक पहुंच गया। कंपनी का टर्नओवर 2013 के मुकाबले 2014 में 104 प्रतिशत बढ़ गया।
6 हजार से ज्यादा एंप्लॉयीज
अब सावजी ढोलकिया की कंपनी में 6 हजार से ज्यादा एंप्लॉयीज हैं। वह डायमंड जूलरी बनाकर विदेश निर्यात भी करते हैं। यह काम उनकी दो कंपनियां- एच.के. डिजाइन्स और यूनिटी जेवेल्स करती हैं।
देश में 6,500 रिटेल आउटलेट्स
एच. के. जेवेल्स प्राइवेट लि. के जरिए जरिए देशभर में बिजनस चलता है। उनका किसना डायमंड जूलरी ब्रैंड 6,500 रिटेल आउटलेट्स के जरिए पूरे देश में उपलब्ध हैं।
50 देशों में निर्यात
सावजी की कंपनी दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में निर्यात करती है। अमेरिका, बेल्जियम, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), हॉन्ग-कॉन्ग, चीन जैसे देशों में उनकी सहायक कंपनियां हैं।
​2011 से हर वर्ष देते हैं अनोखा तोहफा
ढोलकिया 2011 से हर साल कर्मचारियों को इसी तरह के दिवाली बोनस देते रहे हैं। 2015 में उनकी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के तौर पर 491 कार और 200 फ्लैट बांटे थे। 2014 में भी कंपनी ने कर्मचारियों के बीच इन्सेंटिव के तौर पर 50 करोड़ रुपये बांटे थे।
​सिद्धांत के पक्के
अरबपति होने के बावजूद उन्होंने हाल ही में अपने बेटे द्रव्य को पैसे की अहमियत की सीख देने के लिए सिर्फ 7 हजार रुपये के साथ कोची शहर में खुद की दम पर रोजी-रोटी कमाने भेजा था। एमबीए कर चुके बेटे को अपने पैरों पर खड़े होने की कला सीखने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।
प्यार से कहते हैं ‘काका’
सावजी डायमंड इंडस्ट्री एवं अपने एंप्लॉयीज के बीच ‘काका’ के नाम से जाने जाते हैं।
हीरा कारोबार के लिए प्रसिद्ध है सूरत
अभी सूरत की 2,500 से ज्यादा फैक्ट्रियों में हीरा कटिंग और पॉलिशिंग के काम में करीब चार लाख लोग काम कर रहे हैं।
सावजी ढोलकिया ने बनवाए हैं तालाब
2015 में उनकी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के तौर पर 491 कार और 200 फ्लैट बांटे थे। 2014 में भी कंपनी ने कर्मचारियों के बीच इन्सेंटिव के तौर पर 50 करोड़ रुपये बांटे थे। वर्ष 2018 में भी उन्‍होंने दिवाली पर अपने प्रसिद्ध हरि कृष्णा ग्रुप की तरफ से बोनस के तौर पर 600 कर्मचारियों को कार और 900 कर्मचारियों को एफडी दी थी।
सावजी ढोलकिया सिर्फ अपने कर्मचारियों के प्रति ही इतने दिलेर नहीं हैं, बल्कि अपने पैतृक गांव के प्रति भी उनका लगाव और समर्पण किसी प्रेरणा से कम नहीं है। कभी सूखे का दंश झेलने वाले गुजरात के अपने पैतृक गांव दुधाला को सावजी ने अपने समर्पण और त्याग के जरिए एक खुशहाल गांव में तब्दील कर दिया है। जहां कभी लोग पानी के लिए तरसते थे, आज उस गांव में 45 तालाब हैं। ढोलकिया का लक्ष्य गांव में 70 तालाब बनाने का है।