Why Shefali Verma, the new sensation of women’s cricket, became a ‘boy’?

15-year-old batsman Shefali Verma, who made his youngest debut in T20 in the Indian women’s cricket team, had to get his hair cut to take training.
Chandigarh: Shefali Verma of Rohtak, who contributed significantly to India’s 51-run win against South Africa in Surat on Tuesday, started taking cricket training as a boy, as there was no girls academy in his home town. . The 15-year-old batsman, who made his youngest debut in T20 on the Indian women’s cricket team, got his hair cut at the behest of his cricket-obsessed father Sanjeev Verma. Because all the Cricket Academy of Rohtak district of Haryana refused to give him admission.
Sanjeev, who runs a jewelery shop in Rohtak, said, ‘Nobody wanted to take my daughter because there was not a single academy for girls in Rohtak. I begged him to give him admission, but nobody listened. ‘ He told the Times of India, ‘I knocked on the doors of many cricket academies, but rejections were found everywhere. Then I cut my daughter’s hair and took her to an academy and got her admitted as a boy.
Didn’t anyone notice that she is a girl, they said, ‘I was scared, but nobody noticed. At the age of nine, all children look the same. ‘
Shefali, who was hurt many times while playing in the boys team, grew up for cricket. However, conditions changed when her school decided to form a cricket team for girls. Sanjeev said, ‘It was not easy to play against the boys because often his helmet was hurt. On some occasions, the ball also appeared on his helmet grill. I was afraid, but he did not give up. ‘
The passion for cricket in Shefali began when Sachin Tendulkar came to Haryana to play his last Ranji match in 2013. 9-year-old Shefali Chaudhary, sitting with her father at the Bansi Lal Cricket Stadium, was raising slogans of Sachin. Denier Wyatt and Mithali Raj are calling him the next superstar. Shefali scored 46 off 33 balls against South Africa on Tuesday. However, she was able to play only 4 balls in her debut match. Shefali said, ‘After getting ducked in my first match, I was feeling a little relaxed. The senior players were supporting me after my first match and I am happy that I contributed to the team’s victory.
Shefali got a chance to play in the Indian team when he scored 1923 runs in the domestic season, which included six centuries and three half-centuries. Shefali, a Class 10 student of St. Paul’s School in Rohtak, said, “My goal is to play as many matches as possible for India and win matches for the country.”
However, in these years his father Sanjeev had to listen to the taunts of his neighbors and relatives. Sanjeev recalls, ‘Neighbors and relatives started taunting. Your girl plays with boys, girls have no future in cricket. ‘ He said that me and my daughter had to hear so much from the society that nobody would get upset. But my daughter is mentally strong. One day he said to me, “One day these people will chant the slogan of my name.”

Shefali was right. It is only after Shefali’s debut that people are praising him. It was just Sanjeev’s firm pledge that made Shefali playing for India. He said, “When she appeared on TV during the women’s T20 Challenge match in May, playing against the Velocity team, whoever was criticizing her, everyone fell silent.” I was very proud. Sanjeev said, ‘I have three children, a son and two daughters. My younger daughter has also started playing cricket. this is just the begining. I hope more girls from Rohtak play for the country.

महिला क्रिकेट की नई सनसनी शेफाली वर्मा ने ‘लड़का’ बन ली थी ट्रेनिंग
भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सबसे कम उम्र में टी20 में डेब्यू करने वाली 15 साल की बैट्समैन शेफाली वर्मा को ट्रेनिंग लेने के लिए अपने बाल कटवाने पड़े थे।
चंडीगढ़: सूरत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मंगलवार को भारत की 51 रन की जीत में अहम योगदान देने वाली रोहतक की शेफाली वर्मा ने क्रिकेट की ट्रेनिंग एक लड़के के रूप में लेनी शुरू की थी, क्योंकि उनके होम टाउन में लड़कियों के लिए अकैडमी नहीं थी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सबसे कम उम्र में टी20 में डेब्यू करने वाली 15 साल की बैट्समैन ने अपने क्रिकेट के लिए जुनूनी पिता संजीव वर्मा के निर्देश पर अपने बाल कटवा लिए थे। क्योंकि हरियाणा के रोहतक जिला के सभी क्रिकेट अकैडमी ने उन्हें ऐडमिशन देने से इनकार कर दिया था।
रोहतक में जूलरी शॉप चलाने वाले संजीव ने कहा, ‘कोई मेरी बेटी को लेना नहीं चाहता था क्योंकि रोहतक में लड़कियों के लिए एक भी अकैडमी नहीं थी। मैंने उनसे भीख मांगी कि उसे ऐडमिशन दे दें, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।’ उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘मैंने कई क्रिकेट अकैडमी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हर जगह रिजेक्शन मिला। तब मैंने अपनी बेटी के बाल कटवा कर उसे एक अकैडमी ले गया और लड़के की तरह उसका ऐडमिशन कराया।’
क्या किसी ने यह नोटिस नहीं किया कि वह एक लड़की है, उन्होंने कहा, ‘मैं डरा हुआ था, लेकिन किसी ने नोटिस नहीं किया। नौ से के उम्र में सारे बच्चे एक जैसे ही लगते हैं।’
लड़कों की टीम में खेलते हुए कई बार चोट खाने वाली शेफाली का पैशन क्रिकेट के लिए बढ़ता था। हालांकि, स्थितियां बदलीं जब उसके स्कूल ने लड़कियों के लिए क्रिकेट टीम बनाने का फैसला किया। संजीव ने कहा, ‘लड़कों के खिलाफ खेलना आसान नहीं था क्योंकि अक्सर उसकी हेलमेट में चोट लगती थी। कुछ मौकों पर, बॉल उसके हेलमेट ग्रिल पर भी लगती थी। मैं डर जाता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।’
शेफाली में क्रिकेट का पैशन उस वक्त शुरू हुआ जब सचिन तेंडुलकर 2013 में हरियाणा में अपना आखिरी रणजी मैच खेलने आए थे। 9 साल की शेफाली चौधरी बंसी लाल क्रिकेट स्टेडियम में अपने पिता के साथ बैठी सचिन, सचिन के नारे लगा रही थी। डेनियर वायट और मिथाली राज उसे अगला सुपरस्टार करार दे रही हैं। शेफाली ने मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 33 बॉल में 46 रन बनाए। हालांकि, अपने डेब्यू मैच में वह सिर्फ 4 गेंद खेल पाई थीं। शेफाली ने कहा, ‘अपने पहले मैच में डक हो जाने के बाद मैं थोड़ा रिलैक्स महसू कर रही थी। सीनियर प्लेयर्स मेरे पहले मैच के बाद मुझे सपॉर्ट कर रहे थे और मुझे खुशी है कि मैंने टीम की जीत में योगदान दिया।’
शेफाली को भारतीय टीम में खेलने का मौका तब मिला जब उन्होंने घरेलू सीजन में 1923 रन बनाए, जिसमें छह शतक और तीन अर्ध शतक शामिल हैं। रोहतक के सैंट पॉल स्कूल की 10वीं की छात्रा शेफाली ने कहा, ‘मेरा लक्ष्य भारत के लिए ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना है और देश के लिए मैच जीतना है।’
हालांकि, इन सालों में उनके पिता संजीव को अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के ताने सुनने पड़े। संजीव याद करते हैं, ‘पड़ोसी और रिश्तेदारों ने ताने मारने शुरू कर दिए थे। तेरी लड़की लड़कों के साथ खेलती है, लड़कियों का क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है।’ उन्होंने कहा कि मुझे और मेरी बेटी को समाज से इतना सुनना पड़ा कि कोई भी परेशान हो जाए। लेकिन मेरी बेटी मानसिक रूप से मजबूत है। एक दिन उसने मुझसे कहा, ‘एक दिन ये लोग मेरा नाम का नारा लगाएंगे।’

शेफाली सही थी। शेफाली के डेब्यू के बाद ही यही लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। यह सिर्फ संजीव की दृढ़ प्रतिज्ञा थी जिस वजह से शेफाली भारत के लिए खेल रही है। उन्होंने कहा, ‘जब वह मई में महिलाओं के टी20 चैलेंज मैच के दौरान वेलोसिटी टीम के खिलाफ खेलते हुए टीवी पर नजर आई, जो कोई भी उसकी आलोचना कर रहे थे, सब चुप हो गए। मैं बेहद गर्व महसूस कर रहा था।’ संजीव ने कहा, ‘मेरे तीन बच्चे हैं, एक बेटा और दो बेटियां। मेरी छोटी बेटी ने भी क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया है। यह सिर्फ शुरुआत है। मुझे उम्मीद है कि रोहतक की और लड़कियां देश के लिए खेलेंगी।’