गुजरात के हीरा व्यापारी ने अपने बेटों के नाम रखे दुर्योधन और रावण

सूरत: गुजरात के बाबू वघानी ने हीरो का बिजनस के जरिए अपनी किस्मत खुद बनाई लेकिन उनकी चर्चा उनके द्वारा अंधविश्वास को दी गई चुनौती के चलते ज्यादा होती है। बाबू वघानी कई साल पहले जब पहली बार पिता बने थे तो उन्होंने अपने बेटे का नाम भारतीय पौराणिक कथाओं के कुख्यात खलनायक रावण के नाम पर रखा था। लोगों को काफी आश्चर्य हुआ लेकिन वघानी को इस नाम में कोई बुराई नहीं दिखी।
वघानी ने अपने दूसरे बेटे का नाम महाभारत के खलनायक दुर्योधन के नाम पर रखा जिसने पांडवों की पत्नी द्रौपदी पर बुरी निगाह रखी थी। इसके बाद वघानी को लगा कि उनके बेटों के अजीबगरीब नाम समाज की भौहें उठाने के लिए काफी नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने घर में एक्सपेरिमेंट किया। वघानी ने अपने घर को वास्तु के हर सिद्धांत के विपरीत बनवाया और फिर उसका बेहद अटपटा नाम भी रखा- मृत्यु।
कक्षा 8 तक पढ़े वघानी कहते हैं, ‘अंधविश्वास के लिए मेरे जीवन में कोई जगह नहीं है। इसे मैं बचपन से ही समझता हूं।’ स्कूल छोड़ने के बाद भी वघानी का पढ़ाई से मोह नहीं छूटा था इसलिए उन्होंने ईश्वर के विचारों को समझने के लिए धार्मिक और दार्शनिक लेखों को पढ़ा। वघानी ने लाओ-सू, कन्फ़्यूशियस, मूसा, शिंतो, मुहम्मद, जीजस, महावीर, बुद्ध सबको पढ़ा है। वघानी को अपने बेटों के नाम मानव प्रकृति का स्याह पक्ष का प्रतीक माने जाने वाले पौराणिक पात्रों के नाम पर रखने में कोई बुराई नहीं दिखती।
वघानी कहते हैं, ‘लोगों को रावण का पुतला जलाने के बजाय धर्म से जुड़े अंधविश्वासों को जलाना चाहिए।’ मूल रूप से भावनगर जिले के गरियाधर में रहने वाले वघानी 1965 में सूरत में बसे थे। उन्होंने हीरों को पॉलिश करने से इसकी शुरुआत की थी और अब अपना व्यापार खड़ा कर लिया। वघानी के बेटे भी अपने पिता के अपरंपरागत तरीकों से ताल्लुक रखते हैं। वघानी के दोनों बेटों में से छोटे बेटे ने बताया, ‘मैं और मेरे भाई असाधारण नामों से जाने जाते हैं। मैं अपनी ईमेल और दूसरे संपर्क के लिए दुर्योधन नाम का इस्तेमाल करता हूं।’ दुर्योधन अब 40 साल के हैं, उनके दोस्त उन्हें हितेश भी बुलाते हैं।