वाराणसी मैं एक और निर्माणाधीन फ्लाईओवर ढहा, कई घायल

वाराणसी, जेएनएन। कैंट स्‍टेशन के सामने निर्माणाधीन फ्लाईओवर की शटरिंग गिरने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद मचे भगदड़ में कई लोग मामूली तौर पर चोटिल हो गये हालांकि एक की हालत गंभीर है। शुक्रवार की शाम करीब चार बजे यह हादसा हुआ। घटना से चंद मिनट पहले गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत सपत्नीक श्री कृष्ण धर्मशाला से भारत माता मंदिर की तरफ जा रहे थे। 16 मई 2018 को फ्लाईओवर की दो बीम गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी।
इस फ्लाईओवर के निर्माण में शुरुआत से ही कई बार बाधाएं आई और कई बार हादसे भी हुए। 16 मई को हुई घटना में भी सुरक्षा के व्‍यापक इंतजाम नहीं किए गए थे। इसके चलते एक बार पुन: शुक्रवार को हादसा हो गया। सेतु निर्माण की ओर सुरक्षा की दृ‍ष्टि से टीआरबी के जवानों की डयूटी लगाई गई लेकिन यातायात जारी ही रहा। सुरक्षा के लिए यहां पर सौ पद है लेकिन मौके पर मात्र 20-25 कर्मचारी ही रहते हैं।
फ्लाईओवर के नीचे वाहन संचालन के साथ ही दुकानें भी लगी रहती हैं। वहीं निर्माण के दौरान लापरवाही के कारण ही हादसे हो रहे है। इस हादसे में हालांकि दो लोग ही गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के तुरंत बाद घायलों को अस्‍पताल पहुंचा दिया गया। मौके पर कई जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और दुर्घटनास्‍थल का जायजा लिया। 16 मई 2018 को हुए हादसे के दोषी कई इंजीनियरों पर गाज गिरी है। हालांकि इसके बाद भी निर्माण लगातार लापरवाही पूर्ण तरीके से व धीमा काम होने से भी हादसे की संभावना लगातार बनी हुई है।
पूर्व के हादसे : वाराणसी-बाबतपुर फोरलेन निर्माण के दौरान तरना बाजार में बने आरओबी की भी शटरिंग चमांव गेट के पास 1 जून 2018 को अलसुबह चार बजे गिर गयी थी। उस समय आरओबी का निर्माण चल रहा था‚ हालांकि हादसा इतनी सुबह हुआ था कि उसमें कोई घायल नहीं हुआ था। मगर हादसे के दौरान सुरक्षा व्‍यवस्‍था की पोल खुल गई थी।
हादसे से पहले ही कुंद हो चुकी रफ्तार
कैंट लहरतारा मार्ग पर बन रहे फ्लाइओवर हादसे के बाद निर्माण की रफ्तार लगातार कुंद पड़ती गई। 16 मई 2018 के हादसे के बाद काम करने वाले मजदूर भाग गए थे। मुख्य परियोजना प्रबंधक से लेकर अवर अभियंता तक पर गाज गिरने से अधिकारी भी तैनाती से बचते दिखे। मई में हुए हादसे के पांच माह बाद काम ने रफ्तार पकड़ी। जहां पूर्व में इस फ्लाइओवर को पुरानी डिजाइन के मुताबिक मार्च 2020 में पूरा होना था। लेकिन बीम हादसे के बाद इसकी डिजाइन बदली गई और नई टाइमलाइन मार्च 2019 तय की गई। हालांकि फ्लाइओवर अपनी समय सीमा से काफी पीछे चल रहा है। सात माह बीत चुके हैं और फिलहाल स्टील बीम डालने का काम चल रहा है। मुख्यालय से लेकर स्थानीय अधिकारी पहले दिसंबर 2019 तक फ्लाइओवर निर्माण पूरा करने की बात कर रहे थे। वो बाद में काशी विद्यापीठ का 90 मीटर का हिस्सा छोड़कर लहरतारा से चौकाघाट तक फोरलेन को दिसंबर तक पूरा करने की बात कर रहे हैं। वहीं काशी विद्यापीठ तक बन रहे वाई-स्पैन को अप्रैल तक पूरा करने का दम भर रहे हैं। इस दौरान पुल की लागत भी काफी बढ़ती गई। जो फ्लाइओवर 130 करोड़ में तैयार होना था वो स्टील बीम लगने के फैसले के बाद 70 करोड़ बढ़कर 210 करोड़ हो गई।