दिल्ली में रातभर चलता है नए जमाने का मुजरा, साउंडप्रूफ दीवारों के पीछे

नई दिल्ली: इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं… यह लाइनें पढ़कर आपको भी बॉलिवुड का एवरग्रीन मुजरा याद आ गया होगा। ऐसे ही गानों पर फिर शाम ढलते ही घुंघरुओं की आवाज और तबले की थाप गूंजने लगी है।
दिल्ली में नाइटलाइफ नहीं है… ऐसा अकसर आपने सुना होगा, लेकिन इन दिनों दिल्ली के कई इलाकों में एक अलग ही तरह की सीक्रेट नाइटलाइफ चल रही है, जिसके बारे में आपको कोई सुराग तक नहीं होगा। कई पॉश इलाकों में पूरी रात चलने वाले मुजरों की महफिल लगने लगी हैं। फिल्मी गानों पर डांस होता है और लोग ठुमकों पर पैसे लुटाते हैं। देर रात तक शराब परोसी जाती है और हुक्का भी चलता है। एनबीटी की स्पेशल रिपोर्ट में हम आज ऐसे ही ठिकानों का हाल आपको बता रहे हैं।
जब दिल्ली सो रही होती है, तब यहां नाच-गाने के शौकीनों से महफिल गुलजार रहती है। पूरी रात, सुबह तक। जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है, कुछ उसी तर्ज पर। यहां भी बड़े से हॉल में मुजरा होता है। हॉल की चटकीले रंगों वाली दीवारों पर बड़े-बड़े आइने लगे हैं। फॉल्स सीलिंग पर खूबसूरत झूमर लटके हैं।
इस जगह मुजरा देखने वालों की भीड़ जमा रहती है। मेहमाननवाजी भी पूरे अदब से होती है। रात चढ़ने के साथ ही राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन के पास, वेस्ट दिल्ली की कुछ जगहों और ईस्ट में कड़कड़डूमा में ऐसी रौनक परवान चढ़ती है। ऐसी ही एक जगह पर पहुंचा NBT का अंडर कवर एजेंट। कैसी है यह नाइटलाइफ… कौन-कौन होता है यहां, कब तक चलती हैं ये पार्टियां, ये सब अपनी आंखों से देखा हमने। यह 2018 का मुजरा है। ऐसे में माहौल और परंपरा में थोड़ा बदलाव जरूर आया है।
दिल्ली में ये महफिलें गुपचुप ढंग से चलती हैं। साउंड प्रूफ दीवारों के बाहर एक गार्ड बैठा है। सिक्यॉरिटी जांच के बाद कैमरे पर इशारा होता है और खुल जाता है महफिलों से सजे रेस्ट्रॉन्ट का गेट। एंट्री की कोई फीस नहीं है। चेकिंग बेहद सख्त है, उसमें ही वे आपकी नीयत समझने के बाद मंजूरी देते हैं। दरवाजे कैमरे के इशारे पर ही खुलते और बंद होते हैं। अंदर शहर के रईसों का जमघट लगा है। माहौल पूरा सेट है। ग्राहकों की फरमाइश और जेब के हिसाब से महफिल तय होती है। रंग जमने पर नोटों की गड्डियां लुटाई जाती हैं। डांस करने वाली लड़कियां सामने एन्क्लोज़र (स्टेज) में बैठी होती हैं। एक-एक कर परफॉर्मेंस होती है। यहां का एक फंडा है कि बस मौज करें। मयखाने के मजे लें और फटॉग्रफी तो जरा भी न करें। अंडर कवर एजेंट ने बड़ी ही सावधानी से ये एक्सक्लूसिव फोटो क्लिक की हैं।
टेबल पर बैठते ही आपको खाना और ड्रिंक्स ऑर्डर करना होता है। हुक्का भी चलता है। बाकी शहर में ड्रिंक्स ऑर्डर 11 बजे बाद बंद हो जाते हैं, लेकिन यहां पूरी रात महफिल चलने तक आप ऑर्डर कर सकते हैं। आपके आने या जाने पर परफॉर्मेंस रुकती नहीं है। गानों का दौर चलता रहता है और डांसर्स के पैर थिरकते रहते हैं और कमर ठुमकती रहती है। कुछ जगहों पर शाम ढलने के बाद कब सुबह हो जाती है, पता ही नहीं चलता। कुछ रेस्ट्रॉन्ट रात 2-3 बजे तक चलते हैं। बताया गया है कि एक-दो जगहों पर वीकेंड पर रातें और लंबी हो जाती हैं। मुजरा या डांस करने वाली लड़कियों की संख्या भी बढ़ जाती है।
मुजरे में होने वाली मोहक अदाएं ही उसे पॉपुलर बनाती हैं। लड़कियां बेस्ट परफॉर्मेंस देती हैं और कस्टमर दिल खुश होने पर 100 से लेकर 2000 रुपये तक उन पर उड़ाते हैं। आजकल जो गाने सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग हैं, वे हैं…‘इन्हीं लोगों ने… कजरा रे.. और अफगान जलेबी। डांसरों पर कोई कॉमेंट न करे और उन्हें कोई परेशानी न हो, इसके लिए 3-3 बाउंसर्स तैनात किए जाते हैं। इन डांसर्स को कोई छू भी नहीं सकता। इसका ख्याल कस्टमर भी पूरा रखता है। लोग यहां महफिलों में रंग जमाने आते हैं। एन्जॉय करते हैं और पार्टी कर घर लौट जाते हैं।