बिहार के इस शहर के पास पेट्रोल 20 रुपया सस्ता, भाव केवल 69 रुपये लीटर

भारत-नेपाल सीमा पर तैनात कस्टम अधिकारियों का भ्रष्टाचार तस्करी की बड़ी वजह है.
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है, लेकिन भारत के पड़ोसी देश नेपाल में पेट्रोल यहां के मुकाबले सस्ता मिल रहा है. इसी वजह से लोगों ने सीमा पर इसकी तस्करी शुरू कर दी है. नेपाल में पेट्रोल करीब 69 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जो कि भारत के मुकाबले करीब 20 रुपये सस्ता है. सुपौल के सीमावर्ती इलाकों में लोग पेट्रोल लेने के लिए सीमा पार जा रहे हैं.
बदलते जमाने में शराब और सोने की तस्करी ओल्ड फैशन हो गई है, अब जमाना आ गया है पेट्रोल-डीजल की तस्करी का. नेपाल-भारत सीमा पर इन दिनों पेट्रोल-डीजल की तस्करी का धंधा बड़े जोरों से चल रहा है. भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी उछाल ने तेल की तस्करी को भारी कमाई वाला बना दिया है. नेपाल के सुनसरी, भंटाबाड़ी, इटहरी से पेट्रोल और डीजल खरीदकर भारत में बेचना अब नया ट्रेंड बन गया है. इसमें पकड़े जाने पर न तो कोई सजा है और न ही पकड़े जाने का कोई अधिक भय
ये भी पढ़ें- यहां हिंदू ताजिया बनाते हैं और मुसलमान भाइयों के साथ मिलान में भी होते हैं शरीक
सबसे खास बात है कि नेपाल को ज्यादातर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई भारत से ही होती है. भारत नेपाल की खुली सीमा होने की वजह और भारत से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता होने की वजह से नेपाल से इसकी तस्करी हो रही है. इसे रोकने के एसएसबी अब लोगों के बाइक की टंकी की भी जांच करने लगी है लेकिन खुली सीमा होने की वजह से पगडंडी के सहारे तस्करी जारी है.
भारत से नेपाल में घुसने के लिए कोई भी सुविधा पास लेकर 3-4 घंटे नेपाल में घूमकर वापस लौट सकता है. गाड़ियों के लिए भंसार (सीमा शुल्क) कटाना पड़ता है. लेकिन सीमा से सटे इलाकों के लोग तो बिना भंसार दिए ही पगडंडियों से नेपाल चले जाते हैं और 50 से 100 लीटर तेल गैलन में भरकर साइकिल पर लादकर वापस लौट आते हैं.
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात कस्टम अधिकारियों का भ्रष्टाचार इस तस्करी की बड़ी वजह है. कस्टम के अधिकारी बताते हैं कि जब से भारत और नेपाल में पेट्रोल-डीजल के दाम में अंतर ज्यादा हुआ है तब से तस्करी को रोकने के लिए सभी वाहनों की जांच की जा रही है. इसी क्रम में हाल ही में 250 लीटर डीजल बरामद किया गया.
भारत-नेपाल सीमा पर किसी भी सामानों की तस्करी कोई नई बात नहीं है. जब भी किसी भी सामानों के दामों में दोनों देश के बीच अंतर ज्यादा बढ़ जाता है तो तस्करी संगठित और बड़े स्तर पर होने लगती है. इस बार भी वही हो रहा है. इसे रोकने के लिए न तो एसएसबी उतनी सुविधा संपन्न है और न ही यहां का कस्टम.