किन्नरों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में दिया जाए आरक्षण: हाईकोर्ट

उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने राज्य में किन्नरों को लेकर कई निर्देश सरकार को दिए हैं. हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि राज्य की शिक्षण संस्थाएं व सरकारी नौकरी में किन्नर समुदाय को आरक्षण देने के लिए उचित नियम बनाएं. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य में चलने वालीं विभिन्न योजनाओं में जो समाज की बेहतरी के लिए हैं, उनका फ़ायदा किन्नर समुदाय को भी मिले. रानो और रजनी रावत की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आदेश दिया और देहरादून एसएसपी को इन्‍हें सुरक्षा प्रदान करने को भी कहा.

हाईकोर्ट ने कहा कि समाज में इस वर्ग के उत्थान के लिए व्यापक प्रचार व प्रसार करें, ताकि इन लोगों की सामाजिक स्थिति में सुधार हो सके. खण्डपीठ ने सरकार को आदेश दिया है कि इस समुदाय के लिए उचित आवासीय स्कीम 6 महीने में लागू करें. कोर्ट ने कहा है कि जिस परिवार में इस तरह के बच्चे पैदा होते हैं, उन परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए और ऐसे बच्चों को उच्च शिक्षा स्तर की शिक्षा के लिए छात्रवृति प्रदान करें.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, “इस समुदाय के सामाजिक उत्थान के लिए एक अलग वेलफेयर बोर्ड का गठन करें.” साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी अस्पतालों में इनके मुफ्त इलाज व दवा की उचित व्यवस्था की जाए. आदेश में यह भी कहा गया है कि इस समुदाय को राज्य के सभी सार्वजनिक स्थानों जिसमें खेल मैदान, सड़कें, शिक्षण संस्थान, बाज़ार, अस्पताल, होटल में बेरोकटोक आने-जाने की आज़ादी रहेगी.

हाईकोर्ट ने कहा कि इन लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान, जिनमें सरकारी इमारतें, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशनों में अलग शौचालय छह महीने के भीतर बनाए जाएं. हाईकोर्ट ने सरकार को कहा है कि इस तरह के बच्चे पैदा होते हैं तो उसे उसके परिजनों से जुदा न किया जा सके, इसके लिए उचित नियम व कानून तीन महीने के भीतर बनाएं.

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कहा है कि ऐसे लोगों के खिलाफ अपराधिक मुकदमें दर्ज कराए जाएं जो इस तरह के क्रियाकलाप में शामिल हों. हाईकोर्ट ने सभी डीएम को आदेश दिया है कि इस समुदाय के लोगों का रिकॉर्ड रखें. समाज में भेदभाव न किया जाए ताकि इनके आत्म सम्मान को कोई ठेस न पहुंचे और दूसरे व्यक्तियों की तरह इन्हें समान अधिकार प्राप्त हों