चुनावी राज्यों में पीएम मोदी की रैलियों पर लग सकता है ब्रेक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावों के दौरान ताबड़तोड़ प्रचार कर विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने के माहिर माने जाते हैं। हालांकि इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उनकी रैलियों पर ब्रेक लग सकता है। फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे ऐसा लग रहा है कि इस बार संभवत: पीएम मोदी की रैलियों में कमी आएगी। इसकी एक वजह उनके विदेशी कार्यक्रम भी हैं, जिनमें उनका जाना लगभग तय है। ऐसे में राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में शायद पीएम की उतनी रैलियां न हों, जितनी आमतौर पर होती हैं।
विदेशों में तय हैं कई कार्यक्रम
अब तक पीएम के जो संभावित कार्यक्रम हैं, उनके मुताबिक उन्हें 14 और 15 नवंबर को सिंगापुर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेना है। फिर 31 नवंबर से दो दिसंबर तक अर्जेंटीना के दौरे पर जाना है। इस बीच 12 नवंबर को उनका एक दिन का वाराणसी दौरा भी है। इस बीच 19 को मिजोरम में रैली होनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी के पास रैलियों के लिए उतना वक्त नहीं होगा कि वह हर राज्य में 15 से 20 रैलियां कर सकें।
गुजरात और कर्नाटक की तुलना में करेंगे कम रैलियां
पार्टी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल जो प्लानिंग की जा रही है, उसके तहत पीएम मध्य प्रदेश में एक दर्जन और राजस्थान में 10 रैलियों को संबोधित कर सकते हैं। अब अगर गुजरात और कर्नाटक से तुलना करें तो यह संख्या बेहद कम है। मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान 34 रैलियां की थीं। कर्नाटक में उन्होंने 21 रैलियों को संबोधित किया था। हालांकि रैलियों की संख्या में माहौल को देखते हुए बदलाव भी किया जा सकता है। तेलंगाना में तो राज्य इकाई ने ही फिलहाल तीन रैलियों का प्लान राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इसी तरह मिजोरम में भी तीन-चार से अधिक रैलियां होने की उम्मीद नहीं है।
अभी तय नहीं है चुनाव प्रचार का कार्यक्रम
पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री की रैलियां कम होंगी या अधिक, इसका अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि चुनावी माहौल को देखते हुए ही इस तरह के कार्यक्रम तय किए जाते हैं। वैसे भी प्रधानमंत्री की कई संवैधानिक जिम्मेदारियां होती हैं। इसके बाद उनके पास जो भी समय होगा, उसके मुताबिक ही रैलियों की प्लानिंग की जाएगी। जहां तक विदेश कार्यक्रम का सवाल है तो 2 दिसंबर के बाद भी राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में रैलियों के लिए प्रधानमंत्री के पास काफी समय होगा। पार्टी उसी के मुताबिक कार्यक्रम तैयार करेगी।