इंटरव्यू / कमलनाथ बोले- वचन पूरा करेंगे, सरकार बनते ही 10 दिन में किसानों का कर्ज माफ होगा

कमलनाथ ने कहा- किसानों की कर्जमाफी और अन्य योजनाओं में धन की कमी नहीं आने नहीं दी जाएगी
उन्होंने कहा कि मेरे और ज्योतिरादित्य के बीच कभी भी पद को लेकर कोई विवाद नहीं रहा
कमलनाथ ने शुक्रवार को सरकार बनाने का दावा पेश किया था, 17 दिसंबर को लेंगे शपथ
भोपाल . मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार का गठन होने के 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। प्रदेश में हर वर्ग परेशान है, किसान आक्रोशित हैं। युवाओं को रोजगार न मिलने से उनमें निराशा है। हमारी पहली प्राथमिकता प्रदेश में विश्वास का वातावरण पैदा करना है, जिससे नया निवेश आएगा। इन सभी चुनौतियों का हम मुकाबला करेंगे और प्रदेश की जनता को एक पारदर्शी प्रशासन देंगे। कमलनाथ की दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत…
मंत्रिमंडल का गठन सबसे चर्चा के बाद होगा
सवाल : भाजपा कर्जमाफी को लेकर आपको कठघरे में खड़ा कर रही है। क्या 10 दिन में कर्ज माफ कर देंगे। यह टाइम लाइन कब से शुरू होगी?
जवाब : सरकार का गठन होने दें। वचन पत्र में 10 दिन के भीतर कर्जमाफी की जो बात कही है, उसे पूरा करेंगे।
सवाल : आपका मंत्रिमंडल कैसा होगा, कितने सदस्य होंगे?
जवाब : सभी से बातचीत कर रहे हैं। अभी मंत्रिमंडल का आकार तय नहीं हुआ है। कितने मंत्री शपथ लेंगे यह भी अभी तय नहीं हुआ है। मंत्रिमंडल का गठन सभी से चर्चा के बाद होगा।
सवाल : प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। प्रदेश पर दो लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। ऐसे में किसानों का कर्ज माफ करना बड़ी चुनौती है। इसका हल कैसे निकालेंगे?
जवाब : प्रदेश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा कर उसका हल निकालेंगे। किसानों की कर्जमाफी और अन्य योजनाओं में धन की कमी नहीं आने नहीं दी जाएगी।
सवाल : सीएम बनने के बाद आपकी प्राथमिकता क्या होगी?
जवाब : हम सभी के साथ बैठकर तय करेंगे कि प्रशासन में पूरी तरह से पारदर्शिता और ईमानदारी हो। यह व्यवस्था लागू करने में सभी से सहयोग की अपेक्षा करेंगे।
ज्योतिरादित्य से पद को लेकर कोई विवाद नहीं रहा
सवाल : राजस्थान, छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का नाम तय करने में देरी हुई। आखिर आपके और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच क्या केमेस्ट्री थी कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का मामला पहले ही सुलझ गया?
जवाब : मेरे और ज्योतिरादित्य के बीच कभी भी पद को लेकर कोई विवाद की स्थिति नहीं थी। नेता चयन का फैसला पार्टी आलाकमान द्वारा लिए जाने की परंपरा है, बस उसका निर्वहन हुआ। मप्र में चुनाव के पहले भी सभी नेता एकजुट थे और आज भी एकजुट हैं।