20 लाख के क्लेम के लिए शिक्षक ने मजदूर को पत्थर से कुचला, फिर जलाया

बालाघाट . बीमा कंपनी से 20 लाख रुपए का क्लेम पाने के लिए लालबर्रा थाना के कंजई घाटी क्षेत्र में शिक्षक जितेंद्र ठाकरे ने खुद की मौत की कहानी गढ़ी। ठाकरे ने सोची-समझी रणनीति के तहत पहले तो अपने जैसी कद काठी का एक मजदूर तलाशा। वह उसे अपने टाटा मैजिक वाहन में बैठाकर कंजई घाटी ले गया। यहां उसने पहले मजदूर की हत्या कर दी और फिर उसे टाटा मैजिक वाहन पर रखकर आग लगा दी। उसका इरादा मौत के राज को दफन करने का था, लेकिन मोबाइल लोकेशन के जरिए वह पकड़ा गया।
पुलिस के अनुसार 40 वर्षीय जितेंद्र ठाकरे बालाघाट मुख्यालय से लगे ग्राम कोसमी के बंदर झिरिया का निवासी है। वह गांव के समीप ही एक स्कूल में टीचर है और श्रीराम स्कूल के नाम से खुद का शिक्षण संस्थान भी चलाता है। जितेंद्र ने होम लोन के साथ स्कूल बस के लिए भी कर्ज लिया था। उसने खुद का भी 20 लाख रुपए का बीमा कराकर रखा था। लोन की किस्त उसकी आमदनी से ज्यादा थी। कर्ज से निजात पाने के लिए उसने खुद को मरा हुआ घोषित करने का षड्यंत्र रचा, ताकि 20 लाख रुपए उसके परिवार को मिल सकें।
कर्ज होने के कारण खुद की मौत का रचा था षड‌्यंत्र, मोबाइल लोकेशन से खुला राज
काम के बहाने मजदूर को गाड़ी में बैठाकर ले गया था शिक्षक जितेंद्र : पुलिस के अनुसार जितेंद्र को 25 मई को बालाघाट के गुजरी चौक पर भरवेली गांव का दिलीप सोनवानी (40) मजदूर मिला। वह दिलीप को काम के बहाने अपने साथ वाहन में बैठाकर सिवनी रोड पर ले गया। रास्ते में वाहन गरम होने पर वह दिलीप से उसमें पानी डलवाता रहा। कंजई घाटी के समीप जब दिलीप वाहन में पानी डाल रहा था, तभी जितेंद्र ने गाड़ी के लोहे के लीवर से उस पर कई हमले किए। बाद में लहूलुहान व अर्धबेहोश दिलीप को वाहन में बैठाकर उसने बॉटल में रखा पेट्रोल छिड़क दिया और उसके बाद वाहन से ही एक वायर को शॉर्ट करके उसकी चिंगारी से आग लगा दी। हल्का होश आते ही दिलीप जलती हुई गाड़ी से उतरकर जान बचाने के लिए भागा। थोड़ी दूर जाकर ही वह पत्थर से टकराकर गिर गया। इसके बाद आरोपी जितेंद्र ने उसके सिर व अन्य स्थानों पर पत्थर पटककर उसकी हत्या कर दी। अंधेरा होने पर उसने शव पर पेट्रोल छिड़ककर जला दिया। वाहन को खाई में गिराकर दिलीप का चेहरा भी बिगाड़ दिया, ताकि यह साबित हो सके कि जला हुआ व मरने वाला आदमी जितेंद्र है।
खुद को जिंदा बताने पत्नी को किया फोन : घटना को अंजाम देने के बाद जितेंद्र सिवनी होते हुए जबलपुर भाग गया। उसका मोबाइल फोन चालू था। उसने खुद को जिंदा बताने के लिए पत्नी को फोन भी किया था। पुलिस ने संदेह के आधार उसके मोबाइल फोन को ट्रेस करना शुरू किया। उसकी लोकेशन पहले जबलपुर और बाद में सिवनी बस स्टैंड के आसपास मिली। इस आधार पर पुलिस टीम सिवनी भेजी गई और दोपहर में वहां बस स्टैंड के समीप जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे कोर्ट ने जेल भेज दिया है।
claim of 20 lakh, the teacher crushed the worker with stones, then burnt it