मध्य प्रदेश कैब पॉलिसी/ कैब कंपनियों को खोलना होगा दफ्तर, सवारी को ले जाने से मना किया तो 1000 का जुर्माना

भोपाल. ओला-उबर सहित जो भी कंपनियां कैब चलाएंगी, उन्हें दफ्तर खोलना होगा। टोल-फ्री नंबर डिस्प्ले करना होगा, जिससे यात्री समस्याओं संबंधी शिकायत कर उनका समाधान प्राप्त कर सकें। खास बात यह है कि यदि कोई ड्राइवर या संचालक किसी यात्री को ले जाने से मना करता है तो उस पर तत्काल एक हजार का जुर्माना होगा। यह बातें नई कैब पॉलिसी में हैं, जिसे गजट नोटिफिकेशन के जरिए नौ सितंबर से प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
परिवहन विभाग ने शुक्रवार देर शाम एग्रीगेटर नियम, 2018 लागू करने संबंधी गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक अब किसी भी कैब या अन्य कंपनी को कम से कम 25 गाड़ियां जरूरी होंगी, तब ही उसे लाइसेंस जारी किया जा सकेगा।
आरटीए तय करेगा किराया
कंपनियां प्रदेश में यात्री परिवहन का कारोबार तब ही संचालित कर पाएंगी, जब वे लाइसेंस प्राप्त कर लें। इसके बाद रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी आरटीए द्वारा उनका किराया निर्धारित किया जाएगा। आशय यह है कि अब कैब कंपनियां यात्रियों से अपनी मनमर्जी से किराया नहीं ले पाएंगी।
कम से कम 25 वाहन जरूरी
कंपनी बनाकर कम से कम 25 गाड़ियां, ऑटो रिक्शा व बाइक किराए पर देने वाले संचालकों पर ही नए नियम लागू होंगे। जो लोग इक्का-दुक्का टैक्सी, ऑटो व बाइक का संचालन किराए पर कर रहे हैं, वे इनके दायरे में नहीं आएंगे।
पर्यावरण का ध्यान रखा
एग्रीगेटर के लिए जारी लाइसेंस पॉलिसी के अनुसार उसके पास क्लीन फ्यूल यानी पेट्रोल या सीएनजी अथवा एलपीजी या बैटरी से चलित गाड़ियां होना जरूरी है। डीजल से चलने वाली उन्हीं गाड़ियों का उपयोग किया जा सकेगा, जो पूरी तरह फिट हों व राज्य सरकार के पर्यावरण नियमों का पालन करती हों।
हेल्पलाइन नंबर अौर ड्राइवर का मोबाइल नंबर भी करना होगा डिस्प्ले
पैनिक बटन लगाना होगा : कैब संचालकों को कैब और ऑटो में आरटीओ की हेल्पलाइन, पुलिस हेल्पलाइन नंबर, ड्राइवर का फोटो, नाम, मोबाइल नंबर, लाइसेंस नंबर व उसकी कैटेगरी, गाड़ी का इंश्योरेंस व वेलिडिटी सर्टिफिकेट जैसी जानकारियां डिस्प्ले करना होंगी।
एप बेस्ड चल सकेंगे, पर रसीद देना होगी: कैब, ऑटो रिक्शा जैसे किराए के वाहन में सफर करने वाले यात्री को संबंधित कंपनी (एग्रीगेटर) प्रिंटेड रसीद मुहैया करवाएगी। यह रसीद ई-मेल या मोबाइल पर या फिजिकल फॉर्म में भी देना होगी।
10 लाख की बैंक गारंटी: नए नियमों के मुताबिक कंपनी बनाकर कैब का संचालन करने के लिए 10 लाख रुपए की बैंक गारंटी भी देना पड़ेगी। इसी तरह कंपनी में अटैच किए जाने वाले ऑटो रिक्शा को चलाने के लिए दो लाख व किराए पर बाइक संचालन के लिए एक लाख की गारंटी ली जाएगी।