ब्रॉडगेज / ओंकारेश्वर रोड के रेलवे स्टेशन का बदलेगा स्थान, क्योंकि यहां बड़ा स्टेशन बनाना है

सनावद रेलवे स्टेशन पर पुराने भवन को तोड़ करेंगे निर्माणरेलवे द्वारा प्लेटफार्म निर्माण का काम इंदौर के ठेकेदार को दिया गया है

खंडवा/सनावद. खंडवा से इंदौर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का काम तेजी से किया जा रहा है। ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन का स्थान छोटा होने से उसका स्थान बदला जाएगा ताकि नया रेलवे स्टेशन बड़े स्तर पर बन सके। इसके लिए स्थान का चयन किया जा रहा है। इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर मोरटक्का के पास रेलवे क्रासिंग पर पहले फाटक लगा था। इसके कारण यातायात को रोकना पड़ता था। ब्रॉडगेज रेलवे लाइन डालने के दौरान यहां पर अंडर ब्रिज बनाया जाएगा ताकि यातायात प्रभावित न हो।

करीब 6 माह पहले सनावद से महू तक जाने वाली ट्रेन को बंद कर ओंकारेश्वर रोड स्टेशन से शुरू किया गया था। इसके बाद से स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। सनावद रेलवे स्टेशन पर पुराने भवन को तोड़कर नए भवन का निर्माण किया गया। वहीं नया फुट ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। स्टेशन पर दो लाइन की ब्रॉडगेज लाइन डाल दी गई है। प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है। इसमें करीब 600 मीटर लंबे प्लेटफार्म का निर्माण किया जाएगा। वहीं 750 मीटर लूप लाइन बनाई जा रही है। अफसरों की मानें तो अगले साल मार्च माह तक सनावद स्टेशन का काम पूरा हो जाएगा।

पुनासा रोड पर बने रेलवे क्रासिंग पर पहले की तरह रहेगा फाटक
शहर के पुनासा रोड पर स्थित रेलवे क्रासिंग पर पहले फाटक लगा हुआ था। ब्रॉडगेज लाइन डलने के बाद लोगों को यहां ब्रिज बनने के उम्मीद थी लेकिन अब तक रेलवे ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। फाटक बंद होने से यहां पर लोगों को जाम में फंसना पड़ता है। इस संबंध में रहवासियों व लोगों ने जनप्रतिनिधियों के साथ यहां पर ओवरहेड बनाने की मांग की थी लेकिन अफसरों के अनुसार यहां पर अब तक कोई ब्रिज बनाने की योजना नहीं है। इससे यहां पर फाटक का संचालन जारी रखने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्लेटफार्म बना रहे मजदूरों को ठेकेदार नहीं दे रहे सुविधा
रेलवे द्वारा प्लेटफार्म निर्माण का काम इंदौर के ठेकेदार को दिया गया है। जो यहां पर स्थानीय मजदूरों से काम करा रहे हैं। मजदूरों को मिलने वाली सुविधा पर भी ठेकेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जो मजदूर यहां पर काम कर रहे हैं। वह अपने साथ छोटे बच्चे लेकर आते हैं। इससे उनके साथ दुर्घटना होने का डर बना रहता है। इसके लिए ठेकेदार को अलग से झूला घर या अन्य व्यवस्था करने का प्रावधान है। वहीं मजदूरों को न तो दस्ताने दिए जा रहे हैं न ही मास्क की सुविधा है। वह मुंह पर कपड़ा बांधकर काम कर रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ रहा है।

काम के दौरान नहीं रखा जा रहा गुणवत्ता का ध्यान
विजय जैन व निलेश वर्मा ने बताया कि प्लेटफार्म निर्माण के दौरान जो बालू रेत का उपयोग किया जा रहा है। वह मिट्‌टी युक्त है। सीमेंट के मटेरियल में पानी अधिक होने से यह पतला दिखाई दे रहा है। जो कम समय में टूट जाएगा। सीमेंट का माल डालने के दौरान वायब्रेटर का उपयोग नहीं हो रहा है। इससे सीमेंट का माल पूरी तरह से सेट नहीं हो पाता है। रेलवे स्टेशन पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं होने से यह लंबे समय तक नहीं चलेगा। उन्होंने रेलवे के अफसरों से निर्माण की गुणवत्ता जांचने की मांग की है। इस संबंध में रेलवे के उपमुख्य अभियंता संदीप खंडेलवाल ने बताया कि गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायत मिली थी। इस पर सीमेंट, बालू रेत व अन्य सामग्री की जांच लेबोरेट्री में कराई गई है। सामग्री गुणवत्तापूर्ण है।